Posts

आखिर कब होगी सुबह...

Image
भेदभाव सदियों से रहा है ,समाज के मन में जब बात आती है  औरत की , वेद हो या पुराण, रामायण या महाभारत, बताती हैं हमारे ग्रंथो की  पौराणिक   कहानियां , कौन नहीं जानता अहिल्या की कहानी , बलि चढ़ गयी थी इसी क्रूरता की, एक तथाकथित महान संत की , शालीन , खूबसूरत  पत्नी , हुयी थी शापित ऐसे कृत्य के लिए , जो उसने किया ही नहीं ..... इन्द्र हमारे यश्स्वी देवताओं का राजा , वेश बदल कर अहिल्या के पति का  , एक दिन करता है पोषित अपनी वासना... और वो क्रोधित महान संत  , नहीं समझते अहिल्या की मनोदशा, और श्राप देते हैं उसे पत्थर बन जाने का , ये कह कर की वो तभी पवित्र होगी , जब श्री राम के चरण करेंगे उसका उद्धार , और अहिल्या अपने पति की आज्ञा स्वीकार कर , इंतज़ार करती  रही वर्षों तक मुक्ति का , अपनी आत्मा को पत्थर में कैद कर ... , ये है हमारा समाज और इस समाज के पुरुष, जो आदमी के कुकर्मों की सजा भी देते है स्त्री को , अहिल्या का अस्तित्त्व आज भी नहीं बदला , और न ही बदले आधुनिक समाज के तथाकथित संत , जो आज भी बलात्कार के बाद स्त्री से करते हैं प्रश्न...

खुशियों का पिटारा..

Image
आज मैंने बचपन का पिटारा खोला, बड़ा ही अनमोल था वो खजाना खोला, पुराना कुछ सामान यादों की तह खोलता, मुझको वापस अपने प्यारे बचपन से जोड़ता, गोल गोल छेद वाले कुछ पुराने सिक्के, कुछ पुराने टिकट इक डायरी में चिपके, कुछ फूल पत्ते जो मैंने तब सुखाये थे , ख़ुशी के वो पल जो बचपन में चुराए थे, डायरी में लिखी चंद शायरी और गजलें... कुछ पुराने स्टीकर बबल गम में निकले, रंग बिरंगे कंचे , शंख और सीपियाँ , मोतियों से भरी छोटी सी एक डिबिया, और न जाने कितनी यादें हुयी ताज़ा, माँ की कहानियां और कितने रानी राजा, आज बड़े की चाह में छोटा सुख हमे नहीं भाता, बचपन सा जीना हमें अब क्यों नहीं आता...                                                                              mamta                                     ...

इंतज़ार...

Image
धीरे धीरे जिंदगी के सभी रंग फीके हो गए , पर यादों के रंग आज भी सजीव हैं  , वो रंग  जो भरपूर जिए थे तुम्हारे साथ, सब सहेज कर रखे हैं मैंने ,   लाल रंग  तुमने कहा था हमारे  दिल का प्रतीक है, ये फीका न पड़े , उससे मैंने आज तक अपनी यादों की  मांग सजा रखी है .. सुनहरा रंग , तुमने कहा था साथ धड़कती हमारी धडकनों का है , उसे मैंने आज तक सहेजा है अपनी याद का बिछौना बना कर.. नीला रंग  आकाश की तरह असीमित हमारे प्रेम का, आँखों में सहेजा है मैंने अश्रु बना कर.. और हरा रंग तुमने कहा था निशानी है हमारी हरी भरी मोहब्बत की , उससे मैंने  आज तक यादों की,  मखमली घास बिछा रखी है .. की तुम कभी तो आओगे लौट कर , ये रंग करेंगे तुम्हारा स्वागत, और फिर हो उठेंगे जीवंत..                                                            mamta

बेटियां...

दुआ करते हैं बेटे की और , हो जाती हैं बेटियां, बड़ी जीवट होती हैं ये, यूं ही पल जाती हैं बेटियां| चौका बर्तन करती,घर में, पढ़ लिख जाती है बेटियां, सु ख सुविधाएँ बेटों को , पर आगे निकल जाती हैं बेटियां | जन्मदायिनी हैं फिर भी, मारी जाती हैं बेटियां , कभी लालच कभी वासना की, बलि चढ़ जाती हैं बेटियां | रुलाते हैं जब बेटे ,, आंसू पोछती हैं बेटियां, नफरत पाकर भी, सिर्फ प्यार लुटाती हैं बेटियां| कडककड़ाती ठण्ड में, सुहानी धूप होती हैं बेटियां , मानो या न मानो , भगवान् का वरदान होती है बेटियां ...                                                                                    mamta

आस्था....

Image
कैसी कैसी लीला दिखाते हो , अलग अलग नामों से प्रकट हो जाते हो , मगर सुनो तो ज़रा प्रभु जी , हम हैं तुम्हारे तुम जानते हो,  फिर ये लुकाछिपी का खेल क्यों दिखाते हो , सुना है तुम एक पुकार में दौड़े चले आते हो , फिर हमें अपने दरश क्यों नहीं कराते हो ? अब तुम्हें खुद आना ही पड़ेगा, अपना बचन निभाना ही पड़ेगा, वरना तुम्हारे भक्त रूठ जायेंगे , आस्था में प्रश्न चिन्ह लगायेंगे, अब और कितना तड़पाओगे कुछ तो बताओ प्रभु कब आओगे ...??                                                        mamta my 1st Glass painting dedicated to Ganesh jee

उड़ान...

Image
कभी कभी सोचती हूँ, पंछी बन जाऊं   , अनासक्त, तटस्थ, बंधन से मुक्त , उम्मीदों से दूर, कोई पहचान नहीं, किसी की यादों में भी नहीं,  पेड़ों की डालियों में झूलती शाम की गुनगुनी हवाओं में गोते लगाऊं, खुले आसमान के नीचे,  सितारों से बातें करती, इधर से उधर, बस उन्मुक्त उड़ती रहूँ , में चाहती हूँ  पंछी बन जाऊं ...                                 ...mamta 

बांवरा मन !!

Image
क्यों चंचल है ये मन..? क्यों भागता है ये मन? क्यों ठहरता  नहीं है तू , क्यों समझता नहीं है तू... घूमता है यादों में भूत की  ... उड़ता है सपनों में भविष्य के ... रोता है उस पर जो चला गया... पकड़ना चाहता है उसे जो तेरा है ही नहीं.... क्यों जीता नहीं इस पल को जो तेरे साथ है? अनदेखी  करता है वो ख़ुशी जो तेरे आसपास है.. बीते हुए कल  में है, न आने वाले कल में है  .. ख़ुशी तो बस वर्तमान के इस सुनहरे पल में है... क्यों ठहरता  नहीं है तू , क्यों समझता नहीं है तू...  ...mamta